इन 5 खिलाड़ियों ने की आत्महत्या, जिसके बाद सकते में आ गया था पूरा क्रिकेट जगत

आज हम आपको बताएंगे पांच ऐसे खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने खुदकुशी कर ली थी। जिनके बारे में जानकर हर एक क्रिकेट प्रेमी चौक जाएगा इनमें से दो क्रिकेट इंडिया और एक पाकिस्तान से है।

इतिहास के इन काले दिनों के बारे में सोच कर लोग आज भी परेशान हो जाते हैं। क्योंकि उन्होंने उन प्लेयर को खो दिया जिन्होंने अपनी सारी जिंदगी क्रिकेट के नाम कर दी थी।

हमिला रफीक

Hamilla Rafiq

2014 में पाकिस्तान की महिला क्रिकेटर के आत्महत्या से पूरा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सकते में था।

मुल्तान के रहने वाली इस क्रिकेटर ने मुल्तान क्रिकेट किलब के चेयरमैन मोहम्मद सुल्तान अंसारी पर एक मैच के दौरान यौ-न शोषण का आरोप लगाया था। उस दौरान उनकी टीम के सभी लोग उनके साथ खड़े थे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि टीम सलेक्टर जावेद और अंसारी ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में सेलेक्ट करने के लिए शारीरिक संबंध बनाने की मांग की थी। इसके बाद अंसारी ने उनपर झूठा इल्जाम लगाने के लिए दो करोड़ रुपये मानहानि की मांग की 13 जुलाई 2014 को हमिला रफीक ने एसिड पीकर पर खुद को मौत के हवाले कर दिया।

पीटर रोबक

Peter Roebuck

इंग्लैंड की तरफ से 335 फर्स्ट क्लास मैच खेलने वाले इस खिलाड़ी का प्रदर्शन काबिले तारीफ था। लेकिन उन्हें कभी इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका नहीं मिला।

रिटायरमेंट के बाद इन्होंने रेडियो में कमेंट्री करना शुरू कर दिया। 2011 में जब ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका टेस्ट मैच कवर करने के लिए केपटाउन में थे तो पुलिस एक 26 वर्षीय जिंबाब्वे नागरिक के यौ-न शोषण मामले में उनसे पूछताछ करने पहुंचे। लेकिन उसी दिन रोबक ने बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली।

अमोल जिचकर

Amol Zichkar

नागपुर के अमोल जिचकर ने महाराष्ट्र के लिए के कई सारे मैच खेले और वह विधर्भ की अंडर-19 टीम का हिस्सा भी थे। 26 अप्रैल 2017 को नागपुर पुलिस को उनके घर के पंखे से उनका शव दुपट्टे से लटका हुआ मिला। उनके परिवार ने बताया कि पिछले 3 सालों से उन्हें बिजनेस में घाटा मिल रहा था।

डेविड बेरस्ट्रॉ

David Berstroke

डेविड बेरस्ट्रॉ इंग्लैंड के खिलाड़ी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाता थे। 1990 में उन्होंने किरकिट को अलविदा कह दिया और कॉमेंटेटर बन गये 1997 में उन्होंने काफी सारी गोलियां खाकर मरने की कोशिश की थी लेकिन वह बच गये थे बाद में 1998 में उन्होंने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पत्नी की बीमारी के चलते ऐसा किया था।

शिवेश राजन

Shivesh Rajan

1997 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद वह एम्पायर बन गए लेकिन घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जुलाई 2009 को उन्होंने खुदकुशी कर ली थी। इससे पहले उन्होंने लखनऊ डिपार्मेंट अथॉरिटी में 8 साल तक बतौर कर्मचारी काम किया जिसमें उन्हें तीन हजार रुपये हर महीने मिलते।

दोस्तों मेरी आप लोगो से यही विनती है कि ख़ुदकुशी किसी भी समस्या का समाधान नहीं है इसीलिए ऐसे गंदे ख्यालो को कभी अपने दिल में मत आने देना।