केंद्र सरकार ने सदन में माना- अनुमान के अनुरूप नहीं मिल पाता है रक्षा बजट

सरकार ने संसद में माना है कि अनुमान के अनुरूप रक्षा बजट का आवंटन नहीं हो पाता है। एक लिखित प्रश्न के उत्तर में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने बताया कि इस साल रक्षा बजट के लिए 449509 करोड़ के बजट का अनुमान किया गया था, लेकिन आवंटन 324567 करोड़ ही हो पाया। यानी आवंटित राशि 1.24 लाख करोड़ कम है।

सोमवार को दिए गए जवाब में रक्षा मंत्री ने बताया कि यह स्थिति पहले से बनी हुई है। 2014-15 के दौरान 2.84 लाख करोड़ रुपये के रक्षा बजट का अनुमान पेश किया गया था लेकिन आवंटन 2.10 लाख करोड़ ही हुआ।

आंकड़े बताते हैं कि 2014-15 से बजट अनुमानों में करीब 60 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि आवंटन में करीब 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त आवंटन के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

मंहगाई के मुद्दे पर लोक सभा की कार्यवाही विपक्षी दलों के भारी हंगामे के कारण बजट सत्र के दूसरे दिन भी नहीं चली और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र अग्रवाल ने दो बार के स्थगन के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की तो विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के समीप आ गए और जोर जोर से चिल्लाने लगे।

अग्रवाल ने उन्हें कहा कि जिन मुद्दों पर विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है उनकी सभी मांगों पर सरकार विचार करने को तैयार है और सदस्य अपनी सीटों पर चले जाएं और सदन की कार्यवाही चलने दें। लेकिन सदस्यों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया और हंगामा करते रहे जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि को लेकर हंगामा किया और इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बाधित रही और दो बार के स्थगन के बाद बैठक अंतत: दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी।

उपसभापति हरिवंश ने सुबह शून्यकाल में कहा कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र, शिवसेना सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी और द्रमुक के टी शिवा की ओर से नियम 267 के तहत कार्यस्थगन नोटिस मिले हैं जिनमें उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर तुरंत चर्चा का अनुरोध किया है। हरिवंश ने कहा कि इस संबंध में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कल ही व्यवस्था दे दी थी और उनके फैसले पर फिर से विचार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सदस्य मौजूदा सत्र में कई अवसरों पर इस मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं। लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांग पर जोर देते रहे और कुछ सदस्य विरोध जताते हुए आसन के समीप भी आ गए।