24 घंटे के भीतर पाकिस्तान ने मारी पलटी, वापस लिया भारत से कपास और चीनी इंपोर्ट का फैसला

गुरुवार को पाकिस्तान ने आंतरिक मंत्री (Interior Minister) शेख रशीद (Sheikh Rasheed) ने कहा कि जब तक भारत धारा 370 पर लिए गए फैसले को वापस नहीं करता, तब तक भारत से कपास और चीनी का आयात नहीं होगा. 

रविंदर सिंह रॉबिन, नई दिल्ली: पाकिस्‍तान (Pakistan) की इमरान खान (Imran Khan) सरकार ने पलटी मारते हुए भारत से कपास और चीनी के इंपोर्ट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है. प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्‍यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में आर्थिक समन्वय समिति (ECC) के उस प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया गया, जिसमें भारत से कपास और चीनी के इंपोर्ट पर लगे प्रतिबंध को हटाने की गुजारिश की गई थी. बता दें कि ECC ने बुधवार को ही भारत से चीनी और कपास के इंपोर्ट को मंजूरी दी थी.  

गुरुवार को पाकिस्तान ने आंतरिक मंत्री (Interior Minister) शेख रशीद (Sheikh Rasheed) ने कहा कि जब तक भारत धारा 370 पर लिए गए फैसले को वापस नहीं करता, तब तक भारत से कपास और चीनी का आयात नहीं होगा. 

एक दिन पहले ही दी थी अनुमति

बुधवार को पाकिस्‍तान के नए वित्त मंत्री हम्माद अजहर ने घोषणा करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने पड़ोसी देश भारत से आयात को लेकर जो पाबंदी लगाई थी, वह हटा ली गई है. बता दें कि 5 अगस्त, 2019 में कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत से इंपोर्ट बंद कर दिया था.

देशों के बीच व्यापार संबंध बेहतर होने की थी उम्मीद 

वित्त मंत्री ने बुधवार को कहा कि बैठक में एजेंडे में शामिल विषयों पर चर्चा की गई. इसमें भारत से कपास और चीन आयात का मुद्दा शामिल था. इस बारे में विस्तृत चर्चा के बाद आयात की अनुमति दी गई. इन वस्तुओं के आयात शुरू होने से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंध कुछ बेहतर होंगे जो पांच अगस्त, 2019 के बाद से निलंबित था. भारत के जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के निर्णय के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार बंद हो गया था. 

भारत के साथ व्यापार से पाकिस्तान को फायदा

अजहर ने कहा कि निजी क्षेत्र को भारत को 5 लाख टन सफेद चीनी के आयात की अनुमति दी गई है. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अन्य देशों से चीनी आयात की अनुमति दी थी. हालांकि अन्य देशों में इसके दाम ऊंचे थे. उन्होंने कहा, ‘हमारे पड़ोसी देश भारत में चीनी काफी सस्ती है. इसीलिए हमने भारत के साथ चीनी का व्यापार शुरू करने का निर्णय किया.’